करि प्रनाम तिन्ह रामु निहारे
करि प्रनाम तिन्ह रामु निहारे
चौपाई ३, दोहा २७० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
करि प्रनाम तिन्ह रामु निहारे। बेषु देखि भए निपट दुखारे॥ दूतन्ह मुनिबर बूझी बाता। कहहु बिदेह भूप कुसलाता॥ ३ ॥
अर्थ
उन्होंने [आकर] प्रणाम करके श्रीरामचन्द्रजी को देखा। उनका वेष देखकर वे बहुत ही दुखी हुए। मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजी ने दूतों से बात पूछी कि राजा जनक का कुशल-समाचार कहो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम-भरतादि का संवाद