करि प्रबोधु मुनिबर कहेउ अतिथि पेमप्रिय

दोहा २१२ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

करि प्रबोधु मुनिबर कहेउ अतिथि पेमप्रिय होहु। कंद मूल फल फूल हम देहिं लेहु करि छोहु॥ २१२ ॥

अर्थ

इस प्रकार मुनिश्रेष्ठ भरद्वाजजी ने उनका समाधान करके कहा--अब आप लोग हमारे प्रेमप्रिय अतिथि बनिये और कृपा करके कन्द-मूल, फल-फूल जो कुछ हम दें, स्वीकार कीजिये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का दोहा २१२ है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद