कंद मूल फल अमिअ अहारू

चौपाई २, दोहा ६६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कंद मूल फल अमिअ अहारू। अवध सौध सत सरिस पहारू॥ छिनु छिनु प्रभुपद कमल बिलोकी। रहिहउँ मुदित दिवस जिमि कोकी॥ २ ॥

अर्थ

कन्द, मूल और फल ही अमृत के समान आहार होंगे और [वन के] पहाड़ ही अयोध्या के सैकड़ों राजमहलों के समान होंगे। क्षण-क्षण में प्रभु के चरणकमलों को देख-देखकर मैं ऐसी आनन्दित रहूँगी जैसी दिन में चकवी रहती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीसीता-राम-संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का वनगमन का दृढ़ निश्चय और श्रीराम से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम-संवाद