कान मूदि कर रद गहि जीहा

चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कान मूदि कर रद गहि जीहा। एक कहहिं यह बात अलीहा॥ सुकृत जाहिं अस कहत तुम्हारे। रामु भरत कहुँ प्रानपिआरे॥ ४ ॥

अर्थ

कोई कान मूँदकर और दाँतों से जीभ पकड़कर कहते हैं कि यह बात झूठ है। ऐसा कहने से तुम्हारे पुण्य नष्ट हो जाएंगे। भरत जी को तो श्रीरामचन्द्रजी प्राणों के समान प्यारे हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।

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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना