काह करौं सखि सूध सुभाऊ
काह करौं सखि सूध सुभाऊ
चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
काह करौं सखि सूध सुभाऊ। दाहिन बाम न जानउँ काऊ॥ ४ ॥
अर्थ
सखी! क्या करूँ, मेरा तो सीधा स्वभाव है। मैं दायाँ-बायाँ कुछ भी नहीं जानती।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।
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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना