जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु
जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु
चौपाई २, दोहा ४८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु। अबला बिबस ग्यानु गुनु गा जनु॥ एक धरम परमिति पहिचाने। नृपहि दोसु नहिं देहिं सयाने॥ २ ॥
अर्थ
जो हठ करके (कैकेयी की बात को पूरा करने में अड़े रहकर) स्वयं सब दुःखों के पात्र हो गए। स्त्री के वश होने के कारण मानो उसका ज्ञान और गुण जाता रहा। एक (दूसरे) जो धर्म की मर्यादा को जानते हैं और सयाने हैं, वे राजा को दोष नहीं देते।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।
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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना