जौं मागा पाइअ बिधि पाहीं
जौं मागा पाइअ बिधि पाहीं
चौपाई ३, दोहा १२१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं मागा पाइअ बिधि पाहीं। ए रखिअहिं सखि आँखिन्ह माहीं॥ जे नर नारि न अवसर आए। तिन्ह सिय रामु न देखन पाए॥ ३ ॥
अर्थ
यदि ब्रह्मा से माँगे मिले तो हे सखि! [हम तो उनसे माँगकर] इन्हें अपनी आँखों में ही रखें। जो स्त्री-पुरुष इस अवसर पर नहीं आये, वे श्रीसीतारामजी को नहीं देख सके।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम