जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा
जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा
चौपाई ३, दोहा ५१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा॥ बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी। जनु जलचर गन सूखत पानी॥ ३ ॥
अर्थ
लोग विषम ज्वर से जल रहे हैं। लंबी साँसें लेते हुए वे कहते हैं कि श्रीरामचन्द्रजी के बिना जीने की कौन-सी आशा है? महान् वियोग की आशंका से प्रजा ऐसी व्याकुल हो गई है मानो पानी सूख जाने पर जलचर जीवों का समुदाय व्याकुल हो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।
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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना