अति बिषाद बस लोग लोगाईं

चौपाई ४, दोहा ५१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अति बिषाद बस लोग लोगाईं। गए मातु पहिं रामु गोसाईं॥ मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ॥ ४ ॥

अर्थ

सभी पुरुष और स्त्रियाँ अत्यन्त विषाद के वश हो रहे हैं। स्वामी श्रीरामचन्द्रजी माता कौसल्या के पास गये। उनका मुख प्रसन्न है और चित्त में चौगुना चाव है। यह सोच मिट गया है कि राजा कहीं रोक न लें।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।

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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना