जनकसुता तब उर धरि धीरा
जनकसुता तब उर धरि धीरा
चौपाई ४, दोहा २४६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जनकसुता तब उर धरि धीरा। नील नलिन लोयन भरि नीरा॥ मिली सकल सासुन्ह सिय जाई। तेहि अवसर करुना महि छाई॥ ४ ॥
अर्थ
तब जनकसुता ने धीरज धरकर नील कमल के समान नेत्रों में जल भर लिया। सीताजी सब सासुओं से जाकर मिलीं। उस अवसर पर करुणा पृथ्वी पर छा गयी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध