जाना मरमु नहात प्रयागा
जाना मरमु नहात प्रयागा
चौपाई ३, दोहा २०८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जाना मरमु नहात प्रयागा। मगन होहिं तुम्हरें अनुरागा॥ तुम्ह पर अस सनेहु रघुबर कें। सुख जीवन जग जस जड़ नर कें॥ ३ ॥
अर्थ
प्रयागराज में जब वे स्नान कर रहे थे, उस समय मैंने उनका यह मर्म जाना। वे तुम्हारे प्रेम में मग्र हो रहे थे। तुमपर श्रीरामचन्द्रजी का ऐसा ही (अगाध) स्नेह है जैसा मूर्ख मनुष्य का संसार में सुखमय जीवन पर होता है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद