जमुन तीर तेहि दिन करि बासू
जमुन तीर तेहि दिन करि बासू
चौपाई १, दोहा २२१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू॥ रातिहिं घाट घाट की तरनी। आईं अगनित जाहिं न बरनी॥ १ ॥
अर्थ
उस दिन यमुनाजी के किनारे निवास किया। समयानुसार सबके लिये [खान-पान आदि] सुन्दर व्यवस्था हुई। [निषादराज का सल्लेत पाकर] रात ही रात में घाट-घाट की अगणित नावें वहाँ आ गयीं, जिनका वर्णन नहीं किया जा सकता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।
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भरतजी चित्रकूट के मार्ग में