जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा

चौपाई १, दोहा १९८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा। भरत सोधु सबही कर लीन्हा॥ सुर सेवा करि आयसु पाई। राम मातु पहिं गे दोउ भाई॥ १ ॥

अर्थ

लोगों ने जहाँ-तहाँ डेरा डाला। भरतजी ने सभी का पता लगाया [कि सब लोग आकर आराम से टिक गये हैं या नहीं]। फिर देवपूजन करके आज्ञा पाकर दोनों भाई श्रीरामचन्द्रजी की माता कौसल्याजी के पास गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन