जब तें प्रभु पद पदुम निहारे
जब तें प्रभु पद पदुम निहारे
चौपाई ४, दोहा २५१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जब तें प्रभु पद पदुम निहारे। मिटे दुसह दुख दोष हमारे॥ बचन सुनत पुरजन अनुरागे। तिन्ह के भाग सराहन लागे॥ ४ ॥
अर्थ
जब से प्रभु के चरणकमल देखे, तब से हमारे दुःसह दुःख और दोष मिट गये। वनवासियों के वचन सुनकर अयोध्या के लोग प्रेम में भर गये और उनके भाग्य की सराहना करने लगे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली के सत्कार और कैकेयी के गहन पश्चाताप का वर्णन है।
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वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप