गुर पितु मातु स्वामि सिख पालें

चौपाई ३, दोहा ३१५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

गुर पितु मातु स्वामि सिख पालें। चलेहुँ कुमग पग परहिं न खालें॥ अस बिचारि सब सोच बिहाई। पालहु अवध अवधि भरि जाई॥ ३ ॥

अर्थ

गुरु, पिता, माता और स्वामी की शिक्षा (आज्ञा) का पालन करने से कुमार्ग पर भी चलने से पैर गड्ढे में नहीं पड़ता (पतन नहीं होता)। ऐसा विचारकर सब सोच छोड़कर अवध जाकर अवधि भर उसका पालन करो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरतजी को पादुका प्रदान और भरतजी की भावपूर्ण विदाई का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई