गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई

चौपाई १, दोहा १४४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई। बिरहु बिषादु बरनि नहिं जाई॥ चले अवध लेइ रथहि निषादा। होहिं छनहिं छन मगन बिषादा॥ १ ॥

अर्थ

निषादराज गुह सारथी (सुमन्त्रजी) को पहुँचाकर (विदा करके) लौटा। उसके विरह और दुःख का वर्णन नहीं किया जा सकता। वे चारों निषाद रथ लेकर अवध को चले। [सुमन्त्र और घोड़ों को देख-देखकर] वे भी क्षण-क्षण भर विषाद में डूबे जाते थे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।

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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना