घर मसान परिजन जनु भूता
घर मसान परिजन जनु भूता
चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता॥ बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं। सरित सरोबर देखि न जाहीं॥ ४ ॥
अर्थ
घर श्मशान, कुटुम्बी भूत-प्रेत और पुत्र, हितैषी और मित्र मानो यमराज के दूत हैं। बगीचों में वृक्ष और बेलें कुम्हला रही हैं। नदी और तालाब ऐसे भयानक लगते हैं कि उनकी ओर देखा भी नहीं जाता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना