गारीं सकल कैकइहि देहीं
गारीं सकल कैकइहि देहीं
चौपाई ४, दोहा १५६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
गारीं सकल कैकइहि देहीं। नयन बिहीन कीन्ह जग जेहीं॥ एहि बिधि बिलपत रैनि बिहानी। आए सकल महामुनि ग्यानी॥ ४ ॥
अर्थ
सब कैकेयी को गालियाँ देते हैं, जिसने संसार भर को बिना नेत्र का (अंधा) कर दिया! इस प्रकार विलाप करते रात बीत गयी। प्रातःकाल सब बड़े-बड़े ज्ञानी मुनि आये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान