बिलपहिं बिकल दास अरु दासी
बिलपहिं बिकल दास अरु दासी
चौपाई ३, दोहा १५६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बिलपहिं बिकल दास अरु दासी। घर घर रुदनु करहिं पुरबासी॥ अँथयउ आजु भानुकुल भानू। धरम अवधि गुन रूप निधानू॥ ३ ॥
अर्थ
दास-दासीगण व्याकुल होकर विलाप कर रहे हैं और नगरनिवासी घर-घर रो रहे हैं। कहते हैं कि आज धर्म की सीमा, गुण और रूप के भण्डार सूर्यकुल के सूर्य अस्त हो गये!
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान