गए सुमंत्रु तब राउर माहीं

चौपाई २, दोहा ३८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

गए सुमंत्रु तब राउर माहीं। देखि भयावन जात डेराहीं॥ धाइ खाइ जनु जाइ न हेरा। मानहुँ बिपति बिषाद बसेरा॥ २ ॥

अर्थ

तब सुमन्त्र राजमहल में गये, पर महल को भयानक देखकर वे जाते हुए डर रहे हैं। [ऐसा लगता है] मानो दौड़कर काट खायेगा, उसकी ओर देखा भी नहीं जाता। मानो विपत्ति और विषाद ने वहाँ डेरा डाल रखा हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना