एतना कहत नीति रस भूला

चौपाई ३, दोहा २२९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला॥ प्रभु पद बंदि सीस रज राखी। बोले सत्य सहज बलु भाषी॥ ३ ॥

अर्थ

इतना कहते ही लक्ष्मणजी नीतिरस भूल गये और युद्धरसरूपी वृक्ष पुलकावली के बहाने से फूल उठा (अर्थात् नीतिकी बात कहते-कहते उनके शरीर में वीर-रस छा गया)। वे प्रभु श्रीरामचन्द्रजी के चरणों की वन्दना करके, चरण-रज को सिर पर रखकर सच्चा और स्वाभाविक बल कहते हुए बोले।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।

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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध