एहिं जग जामिनि जागहिं जोगी

चौपाई २, दोहा ९३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एहिं जग जामिनि जागहिं जोगी। परमारथी प्रपंच बियोगी॥ जानिअ तबहिं जीव जग जागा। जब सब बिषय बिलास बिरागा॥ २ ॥

अर्थ

इस जगतरूपी रात्रि में योगीलोग जागते हैं, जो परमार्थी हैं और प्रपंच (मायिक जगत्) से छूटे हुए हैं। जगत् में जीव को जागा हुआ तभी जानना चाहिए जब सम्पूर्ण भोग-विलासों से वैराग्य हो जाय।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-निषाद संवाद, सीता-राम से विदा लेकर सुमंत्र के भारी मन से अयोध्या लौटने का वर्णन है।

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लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी