एहि तें कवन ब्यथा बलवाना
एहि तें कवन ब्यथा बलवाना
चौपाई ४, दोहा ८१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि तें कवन ब्यथा बलवाना। जो दुखु पाइ तजहिं तनु प्राना॥ पुनि धरि धीर कहइ नरनाहू। लै रथु संग सखा तुम्ह जाहू॥ ४ ॥
अर्थ
इससे अधिक बलवती और कौन-सी व्यथा होगी, जिस दुःख को पाकर प्राण शरीर को छोड़ेंगे। फिर धीरज धरकर राजा ने कहा—हे सखा! तुम रथ लेकर श्रीराम के साथ जाओ।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना