एहि बिधि राम सबहि समुझावा
एहि बिधि राम सबहि समुझावा
चौपाई १, दोहा ८१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि बिधि राम सबहि समुझावा। गुर पद पदुम हरषि सिरु नावा॥ गनपति गौरि गिरीसु मनाई। चले असीस पाइ रघुराई॥ १ ॥
अर्थ
इस प्रकार श्रीरामजी ने सबको समझाया और हर्षित होकर गुरुजी के चरणकमलों में सिर नवाया। फिर गणपति, गौरि और गिरीसु को मनाकर तथा आशीर्वाद पाकर श्रीरघुनाथजी चले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना