एहि बिधि भरत सेनु सबु संगा

चौपाई २, दोहा १९७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि भरत सेनु सबु संगा। दीखि जाइ जग पावनि गंगा॥ रामघाट कहँ कीन्ह प्रनामू। भा मनु मगनु मिले जनु रामू॥ २ ॥

अर्थ

इस प्रकार भरतजी ने सब सेना को साथ में लिये हुए जगत को पवित्र करने वाली गंगा जी के दर्शन किये। रामघाट को [जहाँ श्रीरामजी ने स्नान-सन्ध्या की थी] प्रणाम किया। उनका मन इतना आनन्दमग्न हो गया, मानो उन्हें स्वयं श्रीरामजी मिल गये हों।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन