दुघरी साधि चले ततकाला

चौपाई ३, दोहा २७२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

दुघरी साधि चले ततकाला। किए बिश्रामु न मग महिपाला॥ भोरहिं आजु नहाइ प्रयागा। चले जमुन उतरन सबु लागा॥ ३ ॥

अर्थ

वे दुघरी साधकर उसी समय चल पड़े। राजा ने मार्ग में कहीं विश्राम नहीं किया। आज भोर में प्रयाग में स्नान करके चले हैं। जब सब लोग यमुना उतरने लगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।

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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन