दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू

चौपाई २, दोहा ३२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू। सब बिधि भरत सराहन जोगू॥ सुनि ब्रत नेम साधु सकुचाहीं। देखि दसा मुनिराज लजाहीं॥ २ ॥

अर्थ

दोनों दिशाओं को समझकर सब लोग कहते हैं कि भरतजी सब प्रकार से सराहने योग्य हैं। सुनकर व्रत और नियमों को साधु सकुचा जाते हैं। उनकी दसा देखकर मुनिराज लजाते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास