दीन बचन गुह कह कर जोरी
दीन बचन गुह कह कर जोरी
चौपाई २, दोहा १०४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
दीन बचन गुह कह कर जोरी। बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी॥ नाथ साथ रहि पंथु देखाई। करि दिन चारि चरन सेवकाई॥ २ ॥
अर्थ
गुह हाथ जोड़कर दीन वचन बोला-हे रघुकुलशिरोमणि! मेरी विनती सुनिये। मैं नाथ के साथ रहकर, रास्ता दिखाकर, चार दिन चरणों की सेवा करके--।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।
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केवट का प्रेम और गंगा पार