धरम धुरीन धरम गति जानी
धरम धुरीन धरम गति जानी
चौपाई ३, दोहा ५३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
धरम धुरीन धरम गति जानी। कहेउ मातु सन अति मृदु बानी॥ पिताँ दीन्ह मोहि कानन राजू। जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू॥ ३ ॥
अर्थ
धर्मधुरीण श्रीरामचन्द्रजी ने धर्म की गति को जानकर माता से अत्यन्त कोमल वाणी से कहा-हे माता! पिताजी ने मुझको वन का राज दिया है, जहाँ सब प्रकार से मेरा बड़ा काम बननेवाला है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद