देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना

चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना। मागेउँ जो कछु मोहि सोहाना॥ सो सुनि भयउ भूप उर सोचू। छाड़ि न सकहिं तुम्हार सँकोचू॥ ४ ॥

अर्थ

इन्होंने मुझे दो वरदान देने को कहा था। मुझे जो कुछ अच्छा लगा, वही मैंने माँगा। उसे सुनकर राजा के हृदय में सोच हो गया; क्योंकि ये तुम्हारा संकोच नहीं छोड़ सकते।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-कैकेयी-संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा कैकेयी की आज्ञा को सहज भाव से स्वीकार कर वनवास के लिए तत्पर होने का वर्णन है।

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श्रीराम-कैकेयी-संवाद