देन कहेहु अब जनि बरु देहू

चौपाई ३, दोहा ३० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहु सत्य जग अपजसु लेहू॥ सत्य सराहि कहेहु बरु देना। जानेहु लेइहि मागि चबेना॥ ३ ॥

अर्थ

आपने ही वर देने को कहा था, अब भले ही न दीजिये। सत्य को छोड़ दीजिये और जगत् में अपयश लीजिये। सत्य की बड़ी सराहना करके वर देने को कहा था। समझा था कि यह चबेना ही माँग लेगी!।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना