देखु देवपति भरत प्रभाऊ
देखु देवपति भरत प्रभाऊ
चौपाई २, दोहा २६६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
देखु देवपति भरत प्रभाऊ। सहज सुभायँ बिबस रघुराऊ॥ मन थिर करहु देव डरु नाहीं। भरतहि जानि राम परिछाहीं॥ २ ॥
अर्थ
हे देवराज! भरतजी का प्रभाव तो देखो। श्रीरघुनाथजी सहज स्वभाव से ही उनके पूर्ण रूप से वश में हैं। हे देवताओं! भरतजी को श्रीरामचन्द्रजी की परछाईं जानकर मन स्थिर करो, डर की बात नहीं है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।
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श्रीराम-भरतादि का संवाद