देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई

चौपाई २, दोहा १९६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई। मिलेउ बहोरि भरत लघु भाई॥ कहि निषाद निज नाम सुबानीं। सादर सकल जोहारीं रानीं॥ २ ॥

अर्थ

निषादराज की प्रीति को देखकर और सुन्दर विनय सुनकर फिर भरतजी के छोटे भाई शत्रुघ्नजी उससे मिले। फिर निषाद ने अपना नाम ले-लेकर सुन्दर (नम्र और मधुर) वाणी से सब रानियों को आदरपूर्वक जोहार की।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन