देखि करहिं सब दंड प्रनामा

चौपाई ४, दोहा २२५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा॥ प्रेम मगन अस राजसमाजू। जनु फिरि अवध चले रघुराजू॥ ४ ॥

अर्थ

सब लोग उस पर्वत को देखकर 'जानकी-जीवन श्रीरामचन्द्रजी की जय हो' ऐसा कहकर दण्डवत्-प्रणाम करते हैं। राजसमाज प्रेम में ऐसा मग्न है मानो श्रीरघुनाथजी अयोध्या को लौट चले हों।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।

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भरतजी चित्रकूट के मार्ग में