देखत स्यामल धवल हलोरे

चौपाई ३, दोहा २०४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

देखत स्यामल धवल हलोरे। पुलकि सरीर भरत कर जोरे॥ सकल कामप्रद तीरथराऊ। बेद बिदित जग प्रगट प्रभाऊ॥ ३ ॥

अर्थ

श्याम और सफेद (यमुना जी और गंगा जी की) लहरों को देखकर भरतजी का शरीर पुलकित हो उठा और उन्होंने हाथ जोड़ दिए। हे तीर्थराज! आप समस्त कामनाओं को पूर्ण करनेवाले हैं। आपका प्रभाव वेदों में प्रसिद्ध और संसार में प्रकट है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद