दाहिन दइउ होइ जब सबही

चौपाई ३, दोहा २८० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

दाहिन दइउ होइ जब सबही। राम समीप बसिअ बन तबही॥ मंदाकिनि मज्जनु तिहु काला। राम दरसु मुद मंगल माला॥ ३ ॥

अर्थ

जब दैव सबके अनुकूल हो, तभी श्रीरामजी के पास वन में निवास हो सकता है। मन्दाकिनीजी में तीनों काल स्नान और आनन्द तथा मंगलों की माला रूप श्रीराम का दर्शन,

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।

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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन