छेत्रु अगम गढ़ु गाढ़ सुहावा
छेत्रु अगम गढ़ु गाढ़ सुहावा
चौपाई ३, दोहा १०५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
छेत्रु अगम गढ़ु गाढ़ सुहावा। सपनेहुँ नहिं प्रतिपच्छिन्ह पावा॥ सेन सकल तीरथ बर बीरा। कलुष अनीक दलन रनधीरा॥ ३ ॥
अर्थ
प्रयाग क्षेत्र ही दुर्गम, मजबूत और सुन्दर गढ़ है, जिसको स्वप्न में भी [पापरूपी] शत्रु नहीं पा सके हैं। सम्पूर्ण तीर्थ ही उसके श्रेष्ठ वीर सैनिक हैं, जो पाप की सेना को कुचल डालने वाले और बड़े रणधीर हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।
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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट