चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी
चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी
चौपाई २, दोहा ३१२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी। बूझत भरतु दिब्य सब देखी॥ सुनि मन मुदित कहत रिषिराऊ। हेतु नाम गुन पुन्य प्रभाऊ॥ २ ॥
अर्थ
सभी विशेषरूप से सुन्दर, विचित्र, पवित्र और दिव्य देखकर भरतजी पूछते हैं और उनका प्रश्न सुनकर ऋषिराज अत्रिजी प्रसन्न मन से सब के हेतु, नाम, गुण और पुण्य-प्रभाव को कहते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का तीर्थ जल स्थापन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी द्वारा तीर्थ जल स्थापन और चित्रकूट के पवित्र स्थलों का दर्शन का वर्णन है।
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भरत का तीर्थ जल स्थापन