चलन चहत बन जीवननाथू
चलन चहत बन जीवननाथू
चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
चलन चहत बन जीवननाथू। केहि सुकृती सन होइहि साथू॥ की तनु प्रान कि केवल प्राना। बिधि करतबु कछु जाइ न जाना॥ २ ॥
अर्थ
जीवननाथ (प्राणनाथ) वन को चलना चाहते हैं। देखें किस पुण्यवान से उनका साथ होगा-- शरीर और प्राण दोनों साथ जायँगे या केवल प्राण ही से उनका साथ होगा? विधाता की करनी कुछ जानी नहीं जाती।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद