बोले मुनिबरु बचन बिचारी
बोले मुनिबरु बचन बिचारी
चौपाई ४, दोहा २५७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बोले मुनिबरु बचन बिचारी। देस काल अवसर अनुहारी॥ सुनहु राम सरबग्य सुजाना। धरम नीति गुन ग्यान निधाना॥ ४ ॥
अर्थ
श्रेष्ठ मुनि देश, काल और अवसर के अनुसार विचार करके वचन बोले-हे सर्वज्ञ! हे सुजान! हे धर्म, नीति, गुण और ज्ञान के भण्डार राम! सुनिये—।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीवसिष्ठजी का भाषण” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट की सभा में वसिष्ठजी द्वारा धर्म, मर्यादा और भरत-भक्ति पर दिए गए मार्गदर्शक वचनों का वर्णन है।
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श्रीवसिष्ठजी का भाषण