बिपति हमारि बिलोकि बड़ि मातु करिअ

दोहा ११ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

बिपति हमारि बिलोकि बड़ि मातु करिअ सोइ आजु। रामु जाहिं बन राजु तजि होइ सकल सुरकाजु॥ ११ ॥

अर्थ

[वे कहते हैं--] हे माता! हमारी बड़ी विपत्ति को देखकर आज वही कीजिए जिससे श्रीरामचन्द्रजी राज्य त्यागकर वन को चले जाएँ और देवताओं का सब कार्य सिद्ध हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का दोहा ११ है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना