बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई

चौपाई १, दोहा १६७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई। कौसल्याँ लिए हृदयँ लगाई॥ भाँति अनेक भरतु समुझाए। कहि बिबेकमय बचन सुनाए॥ १ ॥

अर्थ

भरत, शत्रुघ्न दोनों भाई विकल होकर विलाप करने लगे। तब कौसल्याजी ने उनको हृदय से लगा लिया। अनेकों प्रकार से भरतजी को समझाया और बहुत-सी विवेकभरी बातें उन्हें कहकर सुनायी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।

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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि