भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु

दोहा २४४ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु। अंब ईस आधीन जगु काहु न देइअ दोषु॥ २४४ ॥

अर्थ

फिर श्रीरघुनाथजी सब माताओं से मिले। उन्होंने सबको समझा-बुझाकर सन्तोष कराया कि हे अंब! जगत् ईश्वर के अधीन है, किसी को भी दोष नहीं देना चाहिए।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का दोहा २४४ है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध