भयउ बिकल बरनत इतिहासा

चौपाई ३, दोहा १५५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

भयउ बिकल बरनत इतिहासा। राम रहित धिग जीवन आसा॥ सो तनु राखि करब मैं काहा। जेहिं न प्रेम पनु मोर निबाहा॥ ३ ॥

अर्थ

उस इतिहास का वर्णन करते-करते राजा व्याकुल हो गये और कहने लगे कि श्रीराम के बिना जीने की आशा को धिक्कार है। मैं उस शरीर को रखकर क्या करूँगा जिसने मेरा प्रेम-प्रण नहीं निबाहा?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान