भरत दसा तेहि अवसर कैसी
भरत दसा तेहि अवसर कैसी
चौपाई ४, दोहा २३४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
भरत दसा तेहि अवसर कैसी। जल प्रबाहँ जल अलि गति जैसी॥ देखि भरत कर सोचु सनेहू। भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू॥ ४ ॥
अर्थ
उस समय भरत की दशा कैसी है? जैसी जल के प्रवाह में जल-अलि की गति होती है। भरतजी का सोच और प्रेम देखकर उस समय निषाद देह-भूल हो गया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध