बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ
बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ
दोहा २८४ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ सतिभाय। हमरें तौ अब ईस गति कै मिथिलेस सहाय॥ २८४ ॥
अर्थ
और प्रेमसहित सद्भावसे बोलीं--अब आप शीघ्र डेरे को पधारिये। हमारे तो अब ईश्वर ही गति हैं, अथवा मिथिलेश्वर जनकजी सहायक हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील” प्रकरण का दोहा २८४ है। इस प्रकरण में कौसल्या-सुनयना संवाद में श्रीसीताजी के शील, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन है।
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कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील