बेद बिदित कहि सकल बिधाना
बेद बिदित कहि सकल बिधाना
चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बेद बिदित कहि सकल बिधाना। कहेउ रचहु पुर बिबिध बिताना॥ सफल रसाल पूगफल केरा। रोपहु बीथिन्ह पुर चहुँ फेरा॥ ३ ॥
अर्थ
मुनि ने वेदों में कहा हुआ सब विधान बताकर कहा--नगर में बहुत-से मण्डप (चँदोवे) सजाओ। फलों समेत आम, सुपारी और केले के वृक्ष नगर की गलियों में चारों ओर रोप दो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना