बेचहिं बेदु धरमु दुहि लेहीं

चौपाई १, दोहा १६८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बेचहिं बेदु धरमु दुहि लेहीं। पिसुन पराय पाप कहि देहीं॥ कपटी कुटिल कलहप्रिय क्रोधी। बेद बिदूषक बिस्व बिरोधी॥ १ ॥

अर्थ

जो लोग वेदों को बेचते हैं, धर्म को दुह लेते हैं, चुगलखोर हैं, दूसरों के पापों को कह देते हैं; जो कपटी, कुटिल, कलहप्रिय और क्रोधी हैं, तथा जो वेदों की निन्दा करने वाले और विश्व-विरोधी हैं;।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।

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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि