बरनि न जाइ मनोहर जोरी

चौपाई १, दोहा ११६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बरनि न जाइ मनोहर जोरी। सोभा बहुत थोरि मति मोरी॥ राम लखन सिय सुंदरताई। सब चितवहिं चित मन मति लाई॥ १ ॥

अर्थ

उस मनोहर जोड़ी का वर्णन नहीं किया जा सकता; क्योंकि शोभा बहुत अधिक है, और मेरी बुद्धि थोड़ी है। श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी की सुन्दरता को सब लोग मन, चित्त और बुद्धि तीनों को लगाकर देख रहे हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।

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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम