बार बार मुख चुंबति माता
बार बार मुख चुंबति माता
चौपाई २, दोहा ५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बार बार मुख चुंबति माता। नयन नेह जलु पुलकित गाता॥ गोद राखि पुनि हृदयँ लगाए। स्रवत प्रेमरस पयद सुहाए॥ २ ॥
अर्थ
माता बार-बार श्रीरामचन्द्रजी का मुख चूम रही हैं। नेत्रों में प्रेम का जल भर आया है और सब अंग पुलकित हो गये हैं। श्रीराम को अपनी गोद में बैठाकर फिर हृदय से लगा लिया। सुन्दर स्तनों से प्रेमरस (दूध) बहने लगे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद